गिआना दक्षिणी अमरीका के उत्तरी उपमूल पर स्थित प्रदेश (स्थिति : १ से ८ ४० उ. अ. तथा ५६ से ६१ ३० प. दे.)। इसके उ. प. में वेनेजुएला, पश्चिम में ब्राज़ील, पूर्व में सुरिनाम और उ. पू. में अटलांटिक महासागर है। देश का निम्न उपकूलीय भाग १६ से ४८ कि. मी. की चौड़ाई में समुद्रतट के सहारे फैला हुआ है जो दलदली और वनाच्छादित है। कहीं कहीं यह भाग समुद्रतल से भी नीचा है। सागरतट से दूरी बढ़ने के साथ साथ धरातलीय ऊँचाई भी बढ़ती जाती है और वनों की सघनता क्रमश: घटती जाती है। उपकूलीय भाग की मिट्टी कृषिकार्य के लिए पर्याप्त अनुकूल है। मध्यवर्ती भाग में ऊँची ऊँची पहाड़ियाँ हैं जो पश्चिम में पाकाराइमा पर्वत में विलीन हो जाती हैं। इन उच्च पहाड़ियों का कुछ भाग क्रिस्टेलाइन चट्टानों द्वारा निर्मित है और पठारी भाग क्षैतिज संस्तर तलवाली बालुकाशैलों पर आधारित है जिसमें अनेक स्थलों पर बड़े बड़े जलप्रपात पाए जाते हैं। बालू पत्थरों तथा निर्मित पठार की ऊँचाई १,२०० मीटर से २,४०० मीटर तक है जिसमें अधिकतम ऊँचाई रोराइमा पर्वत की है। नदियों के मार्ग उच्चस्थ जलप्रपातों से घिरे हुए हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्व इसेक्विवे, देमेरारा और वर्विस हैं। नदियों में केवल थोड़ी दूर तक नौका परिवहन संभव है। मध्यवर्ती क्षेत्रों में प्रवेश करने के लिये नदियाँ ही एकमात्र साधन हैं जिससे बहुत सा क्षेत्र आज भी अज्ञात पड़ा हुआ है। इस देश का कुल क्षेत्रफल २,३२,६४८ वर्ग किलामीटर है।

यह भूमध्यरेखीय जलवायु के अंतर्गत पड़ता है। यहां का औसत वार्षिक तापमान २७ सेंटीग्रेड और वर्षा १७५ से ३२५ से. मी. तक होती है। देश का अधिकांश भाग घने सदाबहार वनों से आवृत है। वनों में कठोर इमारती लकड़ी के वृक्ष अधिक मात्रा में उपलब्ध हैं। दलदल और आर्द्र सवाना के वन तटीय भाग में ही सीमित हैं। पठारी भाग में शुष्क सवाना प्रदेश की वनस्पतियाँ पाई जाती हैं। आवागमन के साधनों के अभाव में केवल तटीय वनों का प्रयोग हो पा रहा है।

गिआना में कृषि कार्य उपकूलीय भाग में सीमित है। गन्ना यहां की मुख्य फसल है जो संपूर्ण निर्यात की मात्रा का ४० प्रतिशत है। राज्य द्वारा सिंचाई और जलप्रवाह के लिये ८,००० कि. मी. लंबी नहर का निर्माण कराया गया है। खेती योग्य भूमि का अधिकांश भाग वर्ष के ६ मास तक जल में डूबा रहता है और आगे बोई जानेवाली फसल के लिए उपजाऊ मिट्टी उपलब्ध हो जाती है। चावल यहाँ की द्वितीय मुख्य फसल है जिसका संचालन और कृषि कार्य बहुधा पूर्वी भारतीयों द्वारा किया जाता है। यहां से पर्याप्त मात्रा में चावल ट्रिनिडाड और जमैका को निर्यात होता है। पिछले कुछ वर्षों से यहाँ केला की खेती प्रारंभ हुई है और उसका निर्यात व्यापार भी होने लगा है। तिलहन और नारियल की खेती भी लोगों ने प्रारंभ की है। यद्यपि इस देश के पास मध्यवर्ती भाग में पर्याप्त चरागाह हैं लेकिन यातायात के साधनों के अभाव में पशुपालन कार्य में प्रगति नहीं हो सकी है। यहां के पक्षियों और तितलियों के रंग में असाधारण चमक होती है।

गिआना मैंगनीज, बाक्साइट में काफी धनी है और यहां से हीरा भी निकाला जाता है। बाक्साइट देमेरारा और वर्विस नदियों के बीच के क्षेत्र से निकाला जाता है और मैकेंजी नगर में इसका उद्योग केंद्रित है। वेनेजुएला की सीमा के पास मैंगनीज निकाला जाता है और हीरे की खानें पाकाराइमा पर्वत के क्षेत्र में सीमित हैं।

यहाँ के मूलनिवासी इस क्षेत्र के भीतरी भाग में पाए जाते हैं। अन्य भागों के निवासी कई जातियों के मिश्रण हैं। उपकूलीय क्षेत्र में अफ्रीकी गुलामों के वंशज निग्रो, विदेशी मजदूर, चीनी और अनेक प्रकार के वर्णसंकर पाए जाते हैं।

गिआना में १४४ कि. मी. रेलमार्ग, ६० कि. मी. नहरें तथा १,३६० कि. मी. पक्की सड़कें हैं। यहाँ का कैतर जलप्रपात नियाग्रा से ५ गुना ऊँचा (६८ मीटर) है और विश्व का सुंदरतम जलप्रपात माना जाता है। देमेरारा नदी के मुहाने पर वनाच्छादित मैदान में स्थित जार्जटाउन नगर उस देश की राजधानी है। यहाँ की जनसंख्या १,९५,२५० (१९७०) है। इस नगर में मकान लकड़ी के बने हुए और चमकीले रंगों से रंजित हैं। यह देश का मुख्य बंदरगाह है और यहाँ पर जलयान निर्माण उद्योग का विकास हुआ है। जिसकी जनसंख्या १९६९ में १५,००० थी। मैकेंजी नगर (जनसंख्या २०,०००) बाक्साइट उद्योग का केंद्र है। गिआना के मुख्य निर्यात किए जाने वाले पदार्थ चीनी, रम, चोटा, बाक्साइट, एल्यूमिना, चावल, हीरा और लकड़ियाँ हैं तथा मशीनों, वस्त्र, पेट्रोल इत्यादि का आयात किया जाता है।

१६२० ई. में डच ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहां उपनिवेशन किया और यह प्रदेश १७९६ ई. तक उसके अधिकार में रहा। उसके बाद कुछ ही भाग डच लोगों के हाथ में रह गया जो डच गिआना कहा जाता रहा। और अब यह डच शासन के अंतर्गत सुरिनाम से पृथक् एक स्वतंत्र राज्य है। यह १,४०,१८० वर्ग कि. मी. क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां की संपूर्ण जनसंख्या ४ लाख है जिसमें नीग्रो, पूर्व भारतीय और जावा निवासी सम्मिलित है। इस भूभाग की कृषि तटीय भाग में ही सीमित है। चावल यहां की मुख्य फसल है और कहवा का भी उत्पादन होता है बाक्साइट सुरिनाम का मुख्य खनिज है और पर्याप्त मात्रा में निर्यात किया जाता है। तट से ९६ कि. मी. दूर ्व्राोकोपोंडों नामक स्थान पर तीव्र प्रवाहिनी सुरिनाम नदी से जलविद्युत् उत्पन्न कर एल्यूमीनियम गलाने की भट्ठी में इसका उपयोगकिया जाता है। परामरिवा इस देश की राजधानी और मुख्य बंदरगाह है। यह एक सुनियोजित नगर है जिसमें सड़कें काफी चौड़ी हैं। इस नगर की जनसंख्या १,५०,००० (१९६९) है।

गिआना का शेष भाग अँगरेजों और फ्रांसीसियों के बीच बँट गया। और वे क्रमश: ब्रिटिश गिआना और फ्रेंच गिआना कहे जाते रहे। फ्रेंच गिआना का उपकूलीय भाग को छोड़कर शेष क्षेत्र महत्वहीन है। इसका संपूर्ण क्षेत्रफल ९१,३५० वर्ग किलोमीटर है। इसका उपयोग फ्रेंच लोगों ने दंडभोगियों को बसाने (पेनल सेंटलमेंट) के लिये किया था। समुद्र तट से कुछ ही दूर पर कुख्यात सतुल द्वीप (डेविल्स आइलैंड) स्थित है जिसके प्राय: सभी निवासी दंडभेगी हैं। यह प्रदेश जंगलों से आच्छादित है लेकिन उनका समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा है। स्थानीय प्रयोग के लिए यहाँ चावल, गन्ना, मक्का, केला, इत्यादि का उत्पादन भी होता है। यहां से निर्यात किए जानेवाले मुख्य पदार्थ लकड़ी, रम और सोना है। यहाँ की राजधानी कयेन (जनसंख्या १४,००० (१९६९)) अपने ही नाम की नदी के मुहाने पर स्थित है।

ब्रिटिश गिआना पर अँगरेज प्रारंभ में नीग्रो दासों की सहायता से उत्पादन करते रहे। जब १८३८ ई. में दास प्रथा समाप्त हो गई और नीग्रो श्रमिकों ने अँगरेजों के लिये काम करने के प्रति अनिच्छा प्रकट की तब भारत के श्रमिकों का आयात किया जाने लगा और यह क्रम १९१७ तक चलता रहा। अब १९६६ में इसने स्वतंत्र राष्ट्र का रूप धारण किया है और अब केवल इसे ही गिआना (Guyana) कहते हैं। इसकी जनसंख्या लगभग ७ लाख हैं जिसमें आधे से अधिक भारतीय, एक तिहाई नीग्रो, शेष चीनी, यूरोप निवासी आदि हैं। यहां के मूल निवासी इंडियन अब भी मध्यवर्ती भाग में आदिमकालीन जीवन व्यतीत करते हैं।

(शीतलप्रसाद सिंह)